मृत पूर्वजों की नाराजगी का कारण बनती हैं घटनाएं, मिलते हैं ऐसे खतरनाक संकेत

Pitra Dosh ke Upay

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आपको बता दें कि अपने पितरों को लेकर लोगों के मन में अलग अलग तरह की धारणाये होती हैं जैसे की हमारे पितर हमसे नाराज हैं तो हमें कैसे मालूम चले की वे हमसे नाराज हैं और यदि वे नाराज हैं तो हम उन्हें कैसे प्रसन्न करें, ऐसे कई सवाल हैं जो लोगों के मन में बने रहते हैं, इन्हीं सब बातों के संबंध गहन अध्ययन करने के बाद पता चला है कि पितृ हमारे पूर्वज होते हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर होता है, वो हम से कहीं न कही जुड़े होते हैं क्योंकि उन्होंने कोई ना कोई उपकार हमारे जीवन के लिए किया होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मनुष्य लोक से ऊपर पितृ लोक बताया गया है, पितृ लोक के ऊपर सूर्य लोक बताया गया है और इन सबसे ऊपर स्वर्ग लोक के बारे में बताया गया है ।

Putr dosh upay

मृत्यु के बाद आत्मा पितृ लोक में जाती है
बता दें धर्मशास्त्रों के मुताबिक आत्मा अपने शरीर को त्याग कर सबसे पहले पितृ लोक में जाती है और पहले से ही वहां हमारे पूर्वज होते हैं। अगर उस आत्मा ने अपने जीवन काल में अच्छे कर्म किये हैं तोह हमारे पूर्वज भी उसको प्रणाम कर अपने को धन्य मानते हैं कि इस अमुक आत्मा ने हमारे कुल में जन्म लेकर हमें धन्य कर दिया । और इसके आगे के सफर के बारे में आपको बाताएं तो आगे आत्मा अपने पुण्य के आधार पर सूर्य लोक की तरफ बढती है। यदि और अधिक पुण्य कर्म हैं तो आत्मा सूर्य लोक से आगे बढ़कर स्वर्ग लोक की तरफ चली जाती है, लेकिन बता दें अरबों खरबो में भी ऐसी आत्मा का होना दुर्लभ है जो परमात्मा में विलीन हो जाती हो, जिसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता यानि उसे परमात्मा मुक्ति प्रदान करते हैं | बता दें कि हमारे पूर्वज सूक्ष्म व्यापक शरीर से जब अपने परिवार को देखते हैं और महसूस करते हैं कि हमारे परिवार के लोग न तो हमारे प्रति श्रद्धा रखते हैं और न ही इन्हें हमसे कोई प्यार या स्नेह है । और ना ही किसी भी अवसर पर ये हमको याद करते हैं, न ही अपने ऋण चुकाने के लिए प्रयत्न ही करते हैं, तो ये आत्माएं दुखी हो जाती हैं और अपने वंशजों पर कुप्रभाव डाल देती हैं, जिसे धर्मशास्त्र पितृ- दोष के नाम से पुकारते हैं। धर्मशास्त्री मानते हैं कि पितृ दोष एक अदृश्य बाधा होती है। ये बाधा पितरों द्वारा रुष्ट होने के कारण उनके वंशजों को होती है।

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पितरों के रुष्ट होने के कारण और परेशानियां
बता दें कि हमारे पितरों के रुष्ट होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे की आपके आचरण से, किसी परिजन द्वारा की गयी गलती से, श्राद्ध आदि कर्म ना करने से, अंत्येष्टि कर्म आदि में हुई किसी त्रुटि के कारण भी पितृ दोष हो सकता है। आपको बता दें कि पितृ दोष के कारण उनके वंशजों को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं जिनमे से मानसिक अवसाद, व्यापार में नुकसान, परिश्रम के अनुसार फल न मिलना, विवाह या वैवाहिक जीवन में समस्याएं, कॅरिअर में समस्याएं या संक्षिप्त में कहें तो जीवन के हर क्षेत्र में व्यक्ति और उसके परिवार को बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। आपको बता दें कि ऐसा होने पर अनुकूल ग्रहों की स्थिति, गोचर, दशाएं होने पर भी शुभ फल नहीं मिल पाते, कितना भी पूजा पाठ, देवी, देवताओं की अर्चना की जाए, उसका भी कोई फल हमें प्राप्त नहीं होता |

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धर्मशास्त्रों के अनुसार पितृ हमें 2 प्रकार से प्रभावित कर सकते हैं
धर्मशास्त्री बताते है कि हमारे पितृ हमें कई तरह से प्रभावित कर सकते हैं जिसके लिए धर्मशास्त्रों ने दो प्रकार के पितरों के बारे में बताया है, उनमे से एक अधोगति वाले पितृ हैं और दुसरे उर्ध्वगति वाले पितृ हैं |

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अधोगति वाले पितरों के दोषों का मुख्य कारण परिजनों द्वारा किया गया गलत आचरण, अतृप्त इच्छाएं, जायदाद के प्रति मोह और उसका गलत लोगों द्वारा उपभोग होने पर, विवाह में परिजनों द्वारा गलत निर्णय, परिवार के किसी प्रियजन को अकारण कष्ट देने पर पितर क्रुद्ध होकर परिवार जनों को श्राप दे देते हैं और बताया गया है कि अपनी शक्ति के बल पर अपने वंशजों को नकारात्मक फल प्रदान करते हैं । और दूसरे उर्ध्व गति वाले पितर सामान्यतः पितृदोष उत्पन्न नहीं करते, परन्तु उनका किसी भी रूप में अपमान होने पर अथवा परिवार के पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन नहीं करने पर वह पितृदोष उत्पन्न करते हैं । यही दो तरह के पितरों के बारे में धर्मशास्त्रियों ने कहा है कि इनके द्वारा उत्पन्न पितृदोष से व्यक्ति की भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति बिलकुल रुक जाती है, फिर चाहें कितने भी प्रयास क्यों ना किये जाएं, कितने भी पूजा पाठ क्यों ना किए जाएं,उनका कोई भी कार्य ये पितृदोष सफल नहीं होने देते ।

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पितृ दोष निवारण के बारे में जरुरी जानकारी
धर्मशास्त्री बताते हैं कि सबसे पहले पितृ दोष निवारण के लिए ये जानना ज़रूरी होता है कि किस गृह के कारण और किस प्रकार का पितृ दोष उत्पन्न हो रहा है | जन्म पत्रिका और पितृ दोष जन्म पत्रिका में लग्न, पंचम, अष्टम और द्वादश भाव से पितृदोष का विचार करने में मदद मिलती है । कहा है पितृ दोष में ग्रहों में मुख्य रूप से सूर्य, चंद्रमा, गुरु, शनि और राहू -केतु की स्थितियों से पितृ दोष का विचार करने में मदद मिलती है। और पितृ दोष का सही कारण पता चल जाता है | धर्मशास्त्रियों ने पितृ दोष से मुक्ति के कुछ बेहद खास उपाय बताये हैं जैसे की

1- किसी मंदिर के में पीपल अथवा बड़ का वृक्ष लगाकर रोज़ उसमें जल डालें और उसकी देख रेख करें। जैसे-जैसे वृक्ष फलता फूलता जाएगा वैसे वैसे ही पितृ -दोष दूर होता जाएगा, क्योकि इन वृक्षों पर ही सारे देवी -देवता, पितरों आदि का निवास माना गया है ।

2- और दूसरे उपाय में बताया है कि यदि आपने किसी इंसान का हक छीना है या किसी मजबूर व्यक्ति की धन संपत्ति का हरण किया है तो उसका हक या संपत्ति उसको अवश्य लौटा दें धीरे धीरे इसका असर आपको दिखने लगेगा ।

3- पितृ दोष के अगले उपाय में बताया है कि पीड़ित व्यक्ति को किसी भी एक अमावस्या से लेकर दूसरी अमावस्या तक यानि की एक माह तक किसी पीपल के वृक्ष के नीचे सूर्योदय काल में एक शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए और ये लगातार पूरे एक महीने तक करना चाहिए । एक माह बीतने पर जो अमावस्या आए उस दिन किसी दूध देने वाली गाय का थोड़ा सा गौमूत्र लेके उसे थोड़े जल में मिलाकर इस जल को पीपल के वृक्ष की जड़ों में डाल दें । इसके बाद पीपल वृक्ष के नीचे 5 अगरबत्ती, एक नारियल और शुद्ध घी का दीपक लगाकर अपने पूर्वजों से श्रद्धा पूर्वक अपने कल्याण की कामना करते हुए अपनी सभी गलतियों की माफ़ी मांगनी चाहिए और प्रार्थना के बाद घर आकर उसी दिन दोपहर में कुछ गरीबों को भोजन करा देना चाहिए|

4- संतान हानि के लिए बताया है कि किसी शुभ समय अपने पितरों को प्रणाम कर उनसे अपने द्वारा जाने-अनजाने में किये गए अपराध के लिए क्षमा याचना करें। फिर घर अथवा शिवालय में पितृ गायत्री मंत्र का सवा लाख विधि से जाप करें या कराएं । जाप के उपरांत दशांश हवन के बाद संकल्प लें कि इसका पूर्ण फल पितरों को प्राप्त हो ऐसा करने से पितर अत्यंत प्रसन्न होकर आप पर कृपा करते हैं |

5- पितृ दोष के निवारण के लिए किसी गरीब की कन्या के विवाह में गुप्त रूप से दिल से आर्थिक सहयोग कर दें | इससे पितर अत्यंत प्रसन्न होकर आप पर कृपा करते हैं |

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