February 27, 2024

NavIC: सरकार के इस नए नियम से आपका फोन होगा कंडम! सभी 5G सपोर्ट वाले फोन भी हो जाएंगे बेकार, जानें क्यों लेना पड़ेगा नया फोन

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NavIC: नई दिल्ली। मोदी सरकार स्वदेशी तकनीक के विकास पर लगातार ज़ोर दे रही है। सरकार की मंशा है कि हमारे देश की निर्भरता दूसरे देशों पर ना रहे देश आत्मनिर्भर और मजबूत बनें। इसका मकसद इतना ही नही स्वदेशी चीजों को महत्व देकर विदेशी चीजों से दूर रहने के लिए भी केन्द्र सरकार ठोस कदम उठा रही है। इसी दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाते हुए नया नियम जारी किया है। जिसके तहत अब 1 जनवरी 2025 से हर नए स्मार्टफोन में स्वदेशी नेविगेशन एप्लीकेशन NavIC इनबिल्ड करना अनिवार्य होगा। ऐसे में 1 दिसंबर 2025 से जो कपंनी भारत के नेवीगेशन navIC ऐप को अपने स्मार्टफोन से नहीं जोड़ती है तो उसकी बिक्री भारत में नहीं होगी। सरकार के इस नए फैसले ने बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों Apple, Samsung और Xiaomi की नींद उड़ा दी है। इस मामले में Apple, Xiaomi, Samsung जैसी दिग्गज टेक कंपनियों की सरकार के साथ मीटिंग भी हुई।

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फोन में GPS का इस्तेमाल नहीं

भारत सरकार अब भारत में तेजी से बिकने वाले सभी स्मार्टफोन में NavIC एप्लिकेशन इनबिल्ड करने के लिए जोर दे रही है। क्योकि सरकार नहीं चाहती कि भारत में बिकने वाले किसी भी स्मार्टफोन में अमेरिकी नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए। हालांकि स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि नए नियम के हिसाब से स्मार्टफोन बनाने के लिए हार्डवेयर में बदलाव करना होगा। इस मामले में रिसर्च करने की जरूरत पड़ेगी। साथ ही टेस्टिंग का क्लीयरेंस लेना पडे़गा।

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ये देश करते हैं अपने नेविगेशन ऐप का इस्तेमाल

पीएम मोदी के द्वारा जारी किए जाने वाले निर्देश की सबसे बड़ी वजह यह भी है कि दूसरे देश के लोग जैसे- चीन, जापान, यूरोपियन यूनियन और रूस अपने ग्लोबल और रीजनल नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। जबकि इन देशों के अलावा बाकी के देशों में अमेरिका के नेविगेशन सिस्टम ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) का दुनियाभर में इस्तेमाल हो रहा है।

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सरकार ने नए नेविगेशन सिस्टम को स्मार्टफोन्स में शामिल करने के दिए निर्देश

स्मार्टफोन्स बनाने वाली कंपनियों Apple, Xiaomi, Samsung Electronics और कुछ अन्य स्मार्टफोन मेकर्स के साथ हाल ही में एक मीटिंग्स के दौरान सरकार ने इस नेविगेशन सिस्टम को स्मार्टफोन्स में शामिल करने के निर्देश दिए थे । इस पर कंपनियों का कहना था कि इसके लिए उन्हें रिसर्च करनी होगी और इससे उनकी कॉस्ट भी बढ़ जाएगी । इस बदलाव के लिए कम्पनीज को टेस्टिंग की क्लीयरेंस भी लेनी पड़ेगी । इस बारे में सैमसंग कंपनी ने कोई टिप्पणी करने से अभी इनकार कर दिया है । Apple और Xiaomi ने इस बारे में कोई जानकारी मुहय्या नहीं कराई है | इस प्रोजेक्ट में शामिल IT मिनिस्ट्री और स्पेस एजेंसी ISRO की ओर से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है | सरकारी अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग में सैमसंग ने भी इस बदलाव को लेकर अपना विरोध प्रकट किया है |

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