देवी मां के इस मंदिर में पूजा के लिए आते हैं भालू, आरती के बाद प्रसाद लेकर ही लौटते हैं

Chandi Devi Temple Chhattisgarh

Chandi Devi Temple Chhattisgarh

देशभर में नवरात्री का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दौरान देवी मां के नौ स्वरूपों का पूजन किया जाता है। अतः इन दिनों देश दुनिया के देवी मंदिरों में माता के भक्तों की भारी भीड़ जमा रहती है। देवी मां के बहुत से प्राचीन मंदिर हमारे देश के अलग अलग हिस्सों में हैं। इसी क्रम में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में यहां जानकारी दे रहें हैं। जहां देवी मां के पूजन के समय जंगल से भालू आते हैं तथा आरती के बाद प्रसाद पाकर ही वापस लौटते हैं।

भालू वाला मंदिर

चंडी देवी मंदिर छत्तीसगढ़

आपको बता दें की देवी मां का यह मंदिर छत्तीसगढ़ में है। यह देवी चंडी का मंदिर है। इस मंदिर पर प्रतिदिन भालू का परिवार पूजन के समय आता है। पूजन के बाद भालू का यह पूरा परिवार प्रसाद लेकर ही वापस जाता है। अतः इस मंदिर की ख्याति अब दूर दूर तक पहुँच चुकी है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के घूंचापाली गांव में चंडी देवी का यह प्राचीन मंदिर स्थित है। इस मंदिर में देवी भक्तो की बड़ी आस्था है। बताया जाता है की इस मंदिर का इतिहास 150 वर्ष पुराना है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है तथा यहां हमेशा भक्तों की भीड़ लगी रहती है।

किसी को हानि नहीं पहुंचाते हैं भालू

मंदिर पर भालुओं का परिवार प्रतिदिन देवी मां की आराधना के समय आता है। उसके बाद वे आरती के समय तक मंदिर में ही बैठे रहते हैं। आरती होने पर भालू देवी की प्रतिमा की परिक्रमा करते हैं। देवी मां की आरती होने के बाद प्रसाद भी भालू लेते हैं तथा उसके बाद मंदिर से चले जाते हैं। ख़ास बात यह है की ये भालू जंगली हैं लेकिन कभी किसी भक्त को हानि नहीं पहुंचाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है की यह मंदिर तंत्र साधना का स्थल था। यहां संत महात्मा लोग देवी मां की साधना तंत्र योग के जरिये करते थे। 1950-51 के समय में इस मंदिर को आम जनता के लिए खोल दिया गया था।

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